मीठा बोलो बोल जगत में चेतावनी भजन
मीठा बोलो बोल जगत में चेतावनी भजन
बोलिए सतगुरु महाराज की,
जय हो......
मीठा बोलो बोल जगत में,
मीठे का कोई मोल नहीं,
जो छाती में घाव कर ज्या,
कदे बोलो ऐसा बोल नहीं।
भीड़ पड़ी में काम ना आवै,
वा यारी कोय यारी ना,
ब्याहे पति ने धोका दे ज्या,
वा पतिव्रता नारी ना,
पतिव्रता का धर्म जगत में,
होता डावांडोल नहीं।
जो छाती में घाव कर ज्या,
कदे बोलो ऐसा बोल नहीं।
मीठा बोलो बौल जगत में,
मीठे का कोई मोल नही।
सोने में ना काई लागे,
रखो चरित्र सोने का,
जिस मानस के नहीं तृष्णा,
दुखी कदे होणे का,
हरी भजन करने आल्या के,
लगे नांव में झौळ नहीं,
ज्यो छाती में घाव कर ज्या,
कदे बोलो ऐसा बोल नहीं।
मीठा बोलो बौल जगत में,
मीठे का कोई मोल नही।
निंद्रा चुगली पाप कर्म ते,
रहना चाहिए दूर सदा,
धन दौलत का घमंड सभी का,
होता आया चूर सदा,
पागल और गरीब का चाहिए,
करना कदे मखौल नहीं,
ज्यो छाती में घाव कर ज्या,
कदे बोलो ऐसा बोल नहीं।
मीठा बोलो बौल जगत में,
मीठे का कोई मोल नही।
महेंद्र भट्टी उस ईश्वर के,
हाजिर अपनी जान करो,
वो ही आखिरी घर है सबका,
मालिक का गुणगान करो,
मात पिता की सेवा कर ले,
इससे कोई अनमोल नहीं।
ज्यो छाती में घाव कर ज्या,
कदे बोलो ऐसा बोल नहीं।
मीठा बोलो बौल जगत में,
मीठे का कोई मोल नही।
मीठा बोलो बोल जगत में,
मीठे का कोई मोल नहीं,
जो छाती में घाव कर ज्या,
कदे बोलो ऐसा बोल नहीं।
जय हो......
मीठा बोलो बोल जगत में,
मीठे का कोई मोल नहीं,
जो छाती में घाव कर ज्या,
कदे बोलो ऐसा बोल नहीं।
भीड़ पड़ी में काम ना आवै,
वा यारी कोय यारी ना,
ब्याहे पति ने धोका दे ज्या,
वा पतिव्रता नारी ना,
पतिव्रता का धर्म जगत में,
होता डावांडोल नहीं।
जो छाती में घाव कर ज्या,
कदे बोलो ऐसा बोल नहीं।
मीठा बोलो बौल जगत में,
मीठे का कोई मोल नही।
सोने में ना काई लागे,
रखो चरित्र सोने का,
जिस मानस के नहीं तृष्णा,
दुखी कदे होणे का,
हरी भजन करने आल्या के,
लगे नांव में झौळ नहीं,
ज्यो छाती में घाव कर ज्या,
कदे बोलो ऐसा बोल नहीं।
मीठा बोलो बौल जगत में,
मीठे का कोई मोल नही।
निंद्रा चुगली पाप कर्म ते,
रहना चाहिए दूर सदा,
धन दौलत का घमंड सभी का,
होता आया चूर सदा,
पागल और गरीब का चाहिए,
करना कदे मखौल नहीं,
ज्यो छाती में घाव कर ज्या,
कदे बोलो ऐसा बोल नहीं।
मीठा बोलो बौल जगत में,
मीठे का कोई मोल नही।
महेंद्र भट्टी उस ईश्वर के,
हाजिर अपनी जान करो,
वो ही आखिरी घर है सबका,
मालिक का गुणगान करो,
मात पिता की सेवा कर ले,
इससे कोई अनमोल नहीं।
ज्यो छाती में घाव कर ज्या,
कदे बोलो ऐसा बोल नहीं।
मीठा बोलो बौल जगत में,
मीठे का कोई मोल नही।
मीठा बोलो बोल जगत में,
मीठे का कोई मोल नहीं,
जो छाती में घाव कर ज्या,
कदे बोलो ऐसा बोल नहीं।
मीठा बोलो बोल जगत में - चेतावनी भजन | Mitha Bolo Bol Jagat Mein | Satsangi Bhajan | Kiran Negi
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■ Title ▹ Mitha Bolo Bol Jagat Me
■ Artist ▹ Imanshi
■ Singer ▹ Kiran Negi
■ Music ▹ Kuldeep Mali Aala
■ Keyboard Player ▹ Sachin Kamal
■ Lyrics ▹Mahinder Singh Bhatti
■ Composition ▹ Traditional
■ Song Production Support ▹ Rajesh Madina
■ Editing ▹KV Sain
■ Cameraman ▹Gulshan Bawa
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■ Singer ▹ Kiran Negi
■ Music ▹ Kuldeep Mali Aala
■ Keyboard Player ▹ Sachin Kamal
■ Lyrics ▹Mahinder Singh Bhatti
■ Composition ▹ Traditional
■ Song Production Support ▹ Rajesh Madina
■ Editing ▹KV Sain
■ Cameraman ▹Gulshan Bawa
भजन का सुन्दर सन्देश है की वाणी की मधुरता ही उसकी सुन्दरता है। कबीर साहेब भी कहते हैं की ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोये। औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए।। आशय है की ऐसी वाणी बोलनी चाहिए जो अहंकार त्याग दे और दूसरों को शीतल करे, स्वयं भी शांत हो जाए। मधुर वचन से उच्च कुलीनों का अभिमान मिट जाता है, जैसे ठंडे जल से उफनता दूध शांत होता है। मीठे वचन से चारों ओर सुख फैलता है, यह वश में करने का मंत्र है, कठोर वचन त्यागें।
मीठा बोलना केवल शब्दों की कोमलता नहीं, बल्कि हृदय की पवित्रता का प्रतीक है। यह सिखाता है कि कठोर या आघातकारी वाणी से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसा बोल कभी कल्याणकारी नहीं होता। भजन के माध्यम से समझ आता है कि सच्ची मित्रता, पतिव्रत धर्म, चरित्र की मजबूती और निंदक प्रवृत्तियों से दूरी—सब मीठे बोलने की नींव पर टिके रहते हैं। यह जीवन दर्शन हमें घमंड, तृष्णा और पापों से ऊपर उठाकर ईश्वर भजन, माता-पिता सेवा और गुणगान की ओर ले जाता है। अंततः, मीठे वचन ही अनमोल हैं, जो रिश्तों को अटूट बनाते हैं और आत्मा को शांति प्रदान करते हैं।
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मीठा बोलना केवल शब्दों की कोमलता नहीं, बल्कि हृदय की पवित्रता का प्रतीक है। यह सिखाता है कि कठोर या आघातकारी वाणी से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसा बोल कभी कल्याणकारी नहीं होता। भजन के माध्यम से समझ आता है कि सच्ची मित्रता, पतिव्रत धर्म, चरित्र की मजबूती और निंदक प्रवृत्तियों से दूरी—सब मीठे बोलने की नींव पर टिके रहते हैं। यह जीवन दर्शन हमें घमंड, तृष्णा और पापों से ऊपर उठाकर ईश्वर भजन, माता-पिता सेवा और गुणगान की ओर ले जाता है। अंततः, मीठे वचन ही अनमोल हैं, जो रिश्तों को अटूट बनाते हैं और आत्मा को शांति प्रदान करते हैं।
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