मन चल रे वृंदावन धाम नाम रट राधा प्यारी भजन

मन चल रे वृंदावन धाम नाम रट राधा प्यारी भजन

मन चल रे वृंदावन धाम,
नाम रट राधा प्यारी को,
मन चल रे वृंदावन धाम,
नाम रट राधा प्यारी को,
राधा प्यारी को, 
नाम रट श्यामा प्यारी को,
मन चल रे वृंदावन धाम,
नाम रट राधा प्यारी को,
मन चल रे वृंदावन धाम,
नाम रट श्यामा प्यारी को। 

गली गली में, राधे राधे रटता जा प्यारे,
गली गली में, राधे राधे रटता जा प्यारे,
बिन राधे, बिन राधे,
बिन राधे दरस मिले ना मनवा,
श्याम बिहारी को। 
मन चल रे वृंदावन धाम,
नाम रट राधा प्यारी को,
मन चल रे वृंदावन धाम,
नाम रट श्यामा प्यारी को। 

जनम जनम के पाप कटेंगे,
वृन्दावन आई जा,
जनम जनम के पाप कटेंगे,
वृन्दावन आय जा,
तेरी बिगड़ी, तेरी बिगड़ी,
तेरी बिगड़ी बन जाए बात,
नाम जप कुञ्ज बिहारी को,
मन चल रे वृंदावन धाम,
नाम रट राधा प्यारी को,
मन चल रे वृंदावन धाम,
नाम रट श्यामा प्यारी को। 

 

मन चल रे वृंदावन धाम नाम रट राधा प्यारी को || Radha Rani Bhajan

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Singer : Devkinandan Thakur Ji Maharaj
 
वृंदावन की गलियों में घूमते हुए राधे-राधे का नाम जपते चलो, तो मन को शांति मिलती है। वहां हर कोना राधा प्यारी और श्यामा के प्रेम से रंगा है, जहां बिन उनकी याद के श्याम बिहारी का दर्शन भी अधूरा लगे। जन्म-जन्म के बंधन टूट जाते हैं, बस इतना कर लो कि नाम रटते हुए कुँज बिहारी के पास पहुंच जाओ। वह प्रेम का धाम हमें पुकारता है, कहता है आओ ना, अपनी बिगड़ी बात संवार लो।

सच कहूं, जब मन वृंदावन को सोचता है तो आंखें भीग जाती हैं, जैसे कोई पुराना साथी बुला रहा हो। राधा की लीला हर पाप को धो देती है, श्यामा का नाम हर दुख को मिटा देता है। हमें याद दिलाते हैं कि जीवन की राह में बस नाम का सहारा लो, तो सब आसान हो जाता है। चलो वहां, नाम रटो, और देखो कैसे मनवा खिल उठे। बस यही तो वो जादू है जो सदियों से लाखों दिलों को जोड़ता आया है।
 
श्री वृन्दावन धाम अति पावन और कल्याणकारी है, जो साक्षात् प्रेम और भक्ति का स्वरूप है, जिसे स्वयं भगवान श्रीकृष्ण की लीलास्थली होने का गौरव प्राप्त है। पद्म पुराण और अन्य वैष्णव शास्त्रों के अनुसार, वृन्दावन को 'गोलोक' का भूतल पर विस्तार माना गया है, जहाँ के कण-कण में राधा-कृष्ण की उपस्थिति अनुभव की जाती है। इस पावन रज (धूल) का इतना महत्त्व है कि भक्त इसे मस्तक पर धारण कर स्वयं को कृतार्थ मानते हैं, क्योंकि यहाँ की संकुचित गलियों और कुंजों में आज भी प्रभु की नित्य रासलीला जारी है। जीव का ईश्वर के साथ 'माधुर्य भाव' का संबंध स्थापित होता है, और यहाँ की गई भक्ति एवं परिक्रमा करोड़ों जन्मों के पापों का शमन कर मोक्ष की प्राप्ति को सुगम करती है, बोल श्री राधे राधे, कटे कोटिन जन्म के पाप। 
 
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