आज फैसला करदे बाबा अब और नहीं भजन

आज फैसला करदे बाबा अब और नहीं सह पाया भजन

 
आज फैसला करदे बाबा अब और नहीं भजन

आज फैसला करदे बाबा,
अब और नहीं सह पाया,
तेरे दर पर टूट के आया श्याम,
आज फैसला कर दे बाबा

टूटे सपने टूटी राहें,
हर कोशिश में हार ही पाई,
दुनिया ने मुंह मोड़ लिया है जब,
बस तेरी आस बची है भाई,
रातें लंबी नींदे रूठी,
हर सुबह सवाल लाई,
तेरे नाम से हिम्मत पाई,
वरना सांस भी रुक सी पाई,
आज फैसला करदे बाबा,
अब और नहीं सह पाया,
तेरे दर पर टूट के आया श्याम,
आज फैसला करदे बाबा।

मैं खुद से ही रोज लड़ूं श्याम,
मन मेरा बस रोता जाये,
किस से कहूं मैं दिल का बोझ,
कोई समझ ना पाये ना निभाये,
भीड़ मैं रहकर तन्हा हूं,
हर रिश्ता बस परछाई, 
तेरे आगे सब कह डाला,
अब कोई बात ना छुपाई,
आज फैसला करदे बाबा,
अब और नहीं सह पाया,
तेरे दर पर टूट के आया श्याम,
आज फैसला कर दे बाबा।

ना बुद्धि मांगू ना बल बाबा,
ना सोना चांदी ना,
बस इतनी सी अर्जी सुन ले, 
थाम ले हाथ मेरा श्याम,
हार के आया द्वार पर तेरे,
अब ना कोई भी दावा,
जैसा हूं वैसा अपनाले,
तू ही मेरा सागा बाबा,
आज फैसला करदे बाबा,
अब और नहीं सह पाया,
तेरे दर पर टूट के आया श्याम,
आज फैसला कर दे बाबा।

कभी उजाला कभी अंधेरा,
जीवन बन गया सवाल,
हर मोड़ पर तेरा नाम लिया,
फिर भी क्यों ये हाल बेहाल,
टूटे हौसले बिखरे अरमान,
फिर भी आस ना छोड़ी,
तेरे भरोसे जीता हूं वरना,
दुनिया कब की तोड़ी,
आज फैसला करदे बाबा,
अब और नहीं सह पाया,
तेरे दर पर टूट के आया श्याम,
आज फैसला कर दे बाबा।

लोग हंसे मेरे हालातों पे,
कहने लगे अब कुछ ना होगा,
मैं चुपचाप तुझे याद करूं,
क्योंकि श्याम बिना सब अधूरा,
तेरी चुप भी वचन है बाबा,
तेरा सब कुछ मान लिया,
देर हो चाहे अंधेर नहीं,
ये विश्वास जान लिया,
आज फैसला करदे बाबा,
अब और नहीं सह पाया,
तेरे दर पर टूट के आया श्याम,
आज फैसला कर दे बाबा।
जय श्री श्याम जय खाटू वाले श्याम

 

अब और नहीं सह पाया बाबा 😢 | आज फ़ैसला कर दे बाबा | रुला देने वाला श्याम भजन| Aaj Faisla Karde baba

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जीवन पथ पर जब घना अंधकार छा जाए और सारी प्रयास विफल हो जायें तो मान लेना चाहिए कि अब सब कुछ उस सर्वोच्च शक्ति के हवाले करने का पल आ गया है। हम स्वयं की चतुराई और शक्ति के घमंड में हर समस्या खुद हल करने का प्रयास करते रहते हैं। जब सारा संसार मुंह मोड़ ले और अपने साथ छोड़ दे तब श्याम बाबा की शरण ही अंतिम आश्रय रह जाती है।
 
यह भजन किसी कहानी की तरह नहीं, बल्कि हर उस इंसान की आवाज़ है जो हारकर भी श्याम से उम्मीद लगाए बैठा है। यह भजन उस पल के लिए है जब आँखें नम हों, मन भारी हो और दिल सिर्फ़ श्याम को पुकारे। 

जब हम उनके दर पर जाते है तभी हमारा बंधन उस मोहन रूप से जुड़ता है। वहां ना धन-दौलत की लालसा रहती है, न दिखावे की आवश्यकता। केवल एक ही विनती होती है कि अब तू ही निभा ले श्याम। यह पराजय वास्तव में पराजय नहीं अपितु उस दैवीय पिता पर अटल निष्ठा की शुरुआत है। जहाँ वह स्वयं हमारी उलटी किस्मत को सीधा करने का भार उठाते है।

लोग चाहे जितना हमें दुर्बल ठहराए किंतु यह स्मरण रखना अनिवार्य है कि उनके दरबार में विलंब तो हो सकता है किंतु निराशा कभी नहीं होती है। हमारी मौन वेदना और आंसुओं की धारा भी उस कान्हा के लिए भजन है, जिसे वह शब्दों के बिना ग्रहण कर लेता है। वह हमारी योग्यता नहीं तौलता है वह केवल हमारी बेचैनी और समर्पण को निहारता है। बस आवश्यकता है उसे अपना समझकर पूर्णतः लीन हो जाने की, क्योंकि श्याम बाबा कभी अपने भक्त को निराश नहीं लौटाता है। जय श्री श्याम।
 
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