तीन पिंडीयां दरबार माँ दियां तीन पिंडीयां भजन

तीन पिंडीयां दरबार माँ दियां तीन पिंडीयां भजन

 
तीन पिंडीयां दरबार माँ दियां तीन पिंडीयां भजन

मां दे द्वारे जाना ऐ ओत्थे,
जाके शीश झूकाना ऐ,
ओ द्वार जिदी शान निराली,
जित्थे वसदी मां शेरांवाली

बस इक झलक पिण्डियां दी,
मेरे सारे काज संवारेंगी,
मां मेरी है भोली भाली,
दर्शन देके मैनूँ तारेगी।

आ जाओ सब माँ दे द्वारे,
पिण्डियां दे लै लो नजारे,
काली लक्ष्मी सरस्वती, 
सबदी बेड़ी पार उतारे।

तीन पिंडीयां तीन पिंडीयां,
दरबार माँ दियां तीन पिंडीयां,
भर देंदीयां हर बार,
झोली साडी भर देंदीयां,
तीन पिंडीयां तीन पिंडीयां,
दरबार माँ दियां तीन पिंडीयां।

चिठ्ठियाँ पेजके दाती बुलाऊंदी,
पगतां नूं ऐ गले लगाऊंदी,
दुख-दर्दां दी खोल किताब,
माँ कर लेंदी सारा हिसाब।

मिट जांदीयां मिट जांदियां,
तकलीफ़ां सारीयां मिट जांदीयां,
भर देंदीयां हर बार,
झोली साडी भर देंदीयां,
तीन पिंडीयां तीन पिंडीयां,
दरबार माँ दियां तीन पिंडीयां।

नाम तेरे दी मस्ती छांदी,
मन मेरे नूं बौत है भांदी,
मईया जिसते मेहर लुटांदी,
ओदी तां गुड्डी चढ़ जांदी,
आ जांदीयां आ जांदीयां,
दरबार संगतां आ जांदीयां,
भर देंदीयां हर बार,
झोली साडी भर देंदीयां,
तीन पिंडीयां तीन पिंडीयां,
दरबार माँ दियां तीन पिंडीयां।

दर तेरे जद लगदे मेले,
हर पिंडी रंगां विच खेले,
सोणे सोणे चोले फबदे,
चुन्नियां छत्र नाल ने सजदे,
कर लैंदीयां कर लैंदीयां,
स्वीकार भेंटा कर लैंदीयां,
भर देंदीयां हर बार,
झोली साडी भर देंदीयां,
तीन पिंडीयां तीन पिंडीयां,
दरबार माँ दियां तीन पिंडीयां।

पिंडियाँ चमके सूरज वांगू,
प्यार तू कर लै ध्यानु वांगू,
कोई भेद ना पा सकेया ऐ,
अभिमानी दा सिर झुकेया ऐ,
हो जांदियां हो जांदियां ने,
मुरादां पूरीयां हो जांदियां,
भर देंदीयां हर बार,
झोली साडी भर देंदीयां,
तीन पिंडीयां तीन पिंडीयां,
दरबार माँ दियां तीन पिंडीयां।

माँ दे दर ते जो वी आंदा,
खाली ना ओ वापस जांदा,
सबदे सुत्ते भाग जगांदी,
हर पासे हरियाली छांदी,
बन जांदीयां बन जांदियां ने,
किस्मतां ऐत्थे बन जांदीयां
भर देंदीयां हर बार,
झोली साडी भर देंदीयां,
तीन पिंडीयां तीन पिंडीयां,
दरबार माँ दियां तीन पिंडीयां।

तीन पिंडीयां तीन पिंडीयां,
दरबार माँ दियां तीन पिंडीयां,
भर देंदीयां हर बार,
झोली साडी भर देंदीयां।

 

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मां के दर पर पहुंचते ही मन को एक अजीब सुकून मिलता है। वो तीन पिंडियां वहां चमकती रहती हैं जैसे सूरज की किरणें हर अंधेरे को मिटा देती है वैसे ही ये सभी दुःख दर्द मिटा देती हैं। शीश झुकाते ही सारी थकान गायब हो जाती है। दुख दर्द की किताब खुद ही बंद हो जाती है। मां भोली भाली हैं बस एक नजर देखा तो सारे काम संवर जाते है। कितनी बार देखा है कि लोग खाली हाथ आते हैं और लौटते वक्त झोली भरी हुई लेकर जाते हैं। वो दुख सुनती हैं गले लगाती हैं और फिर सब कुछ नया सा बना देती हैं।

जब नाम की मस्ती छा जाती है तो उसी में मन बंध जाता है। मेले लगते हैं दर पर रंग बिरंगे खेल होते हैं। सोने जैसे चोले पहने वो मुस्कुराती रहती हैं। काली का बल, लक्ष्मी का धन, सरस्वती का ज्ञान सब कुछ मिल जाता है वहां। अभिमानी भी सिर झुका लेता है, भेद मिट जाता है। हर आने वाला कुछ न कुछ पाता है, किस्मतें हरियाली ओढ़ लेती हैं। आओ ना आज झोली खुली रखो मां भर देंगी। जय जय माता रानी थी।
 
तीन पिंडी माता अपने भक्तों पर सदा ही आशीर्वाद देती है। माता रानी जम्मू-कश्मीर के त्रिकुट पर्वत में स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर की पवित्र गुफा में विद्यमान तीन पवित्र पवित्र शिलाओं या पिंडियों से है। ये पिंडियाँ आदि शक्ति के तीन रूपों का प्रतीक हैं: महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती, जो क्रमशः विनाश, पालन और सृष्टि की ऊर्जाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। 

वैष्णो देवी के तीन पिंडी गुफा में प्रमुख अनुष्ठान भक्तों द्वारा माता के स्वरूपों (महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती) के दर्शन और आराधना पर केंद्रित होते हैं। यहाँ कोई मूर्ति पूजा नहीं, बल्कि स्वयंभू पिंडियों का दर्शन मुख्य अनुष्ठान है। पंडितों द्वारा दर्शन कराए जाते हैं, जहाँ भक्त प्रार्थना करते हैं।

तीन पिंडी गुफा पर वैष्णो देवी मंदिर में विशेष त्योहार मुख्यतः नवरात्रि (चैत्र और शारदीय) और दीपावली के दौरान आयोजित होते हैं। इनमें लाखों भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, विशेष दर्शन व्यवस्था और धार्मिक कार्यक्रम होते हैं। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड इनकी भव्य तैयारी करता है। 
 
आज 08-01-26 प्रात:काल (सुबह)ஜ माँ वैष्णों देवी दरबार सेभेंट श्री मनिंद्र जी द्वारा 

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